मेहँदी से कुछ गुर सिख ले बनने को इंसान!
जितना खुद को पीस ले उतनउ बनो महान!!
घर का कचरा जोड़ कर बेच दियो कबाड़!
कबहु मन में झांक लो कचरा भरा तमाम!!
जितना खुद को पीस ले उतनउ बनो महान!!
घर का कचरा जोड़ कर बेच दियो कबाड़!
कबहु मन में झांक लो कचरा भरा तमाम!!
उड़ती मन पतंग देख, जियरा न हर्षाये !
जिंदगी की डोर ये, न जाने कब कट जाये!!
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