Saturday, February 4, 2017

दोहे

मेहँदी से कुछ गुर सिख ले बनने को इंसान!
जितना खुद को पीस ले उतनउ बनो महान!!


घर का कचरा जोड़ कर बेच दियो कबाड़!
कबहु मन में झांक लो कचरा भरा तमाम!!


उड़ती मन पतंग देख, जियरा न हर्षाये !
जिंदगी की डोर ये, न जाने कब कट जाये!!

No comments:

Post a Comment